livebharatsamachar.com ब्यूरो: देश की शिक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों और बदहाल बुनियादी ढांचे को लेकर भाकपा (माले) ने अब एक निर्णायक मोर्चा खोलने का निर्णय लिया है। जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए सफल प्रदर्शन के बाद पार्टी ने अपनी इस मुहिम को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए ‘स्कूल सुधारो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों की गिरती स्थिति पर सरकार को घेरना और शिक्षा के अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करवाना है।
अभियान का मुख्य एजेंडा
भाकपा (माले) के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें स्कूलों के ऑडिट और स्थानीय स्तर पर जन-दबाव बनाने का काम किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि देश का युवा और अभिभावक अब शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
शिक्षा केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव है। यदि हमारे सरकारी स्कूल जर्जर रहेंगे और शिक्षकों के पद खाली रहेंगे, तो हम भविष्य की पीढ़ी को क्या देंगे? हम इस अभियान के जरिए हर स्कूल की हकीकत जनता के सामने लाएंगे।
प्रमुख मांगें और आगामी रणनीति
- देश भर के सरकारी स्कूलों में रिक्त पड़े शिक्षकों के पदों को अविलंब भरा जाए।
- स्कूलों के बुनियादी ढांचे, जैसे कि पेयजल, शौचालय और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाई जाए और सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जाएं।
- स्थानीय स्तर पर ‘स्कूल निगरानी समितियों’ का गठन किया जाएगा जो मिड-डे मील और शैक्षणिक गुणवत्ता पर नजर रखेंगी।
जंतर-मंतर की गूंज और भविष्य की राह
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने शिक्षा के मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। भाकपा (माले) अब इस गति को बनाए रखने के लिए राज्य स्तर पर भी बड़े सम्मेलनों और रैलियों की योजना बना रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि आने वाले समय में शिक्षा का मुद्दा चुनावी राजनीति में भी एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यह अभियान आने वाले हफ्तों में विभिन्न राज्यों के ग्रामीण इलाकों में भी दस्तक देगा, जहां स्कूलों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है।