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livebharatsamachar.com ब्यूरो: चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत देते हुए लीजहोल्ड प्रॉपर्टी की बिक्री और हस्तांतरण प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब संपत्ति बेचने के लिए अनिवार्य 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (NDC) की शर्त को समाप्त कर दिया गया है। इस निर्णय से उन हजारों निवासियों को लाभ होगा जो लंबे समय से जटिल कागजी प्रक्रियाओं के कारण परेशान थे।

प्रशासन का निर्णय और प्रक्रिया में बदलाव

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। पहले लीजहोल्ड संपत्तियों के हस्तांतरण के समय एस्टेट ऑफिस से एनडीसी लेना एक अनिवार्य प्रक्रिया थी, जिसमें अक्सर लंबा समय लगता था और कई बार तकनीकी कारणों से फाइलें अटकी रहती थीं। अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जिससे प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया अब काफी तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

प्रशासन के प्रवक्ता ने कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम करना और रियल एस्टेट क्षेत्र में आ रही बाधाओं को दूर करना है। अब संपत्ति हस्तांतरण के लिए केवल आवश्यक दस्तावेजों की जांच ही पर्याप्त होगी।

इस फैसले के मुख्य बिंदु

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

पिछले काफी समय से प्रॉपर्टी डीलर्स और आम जनता की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि एनडीसी की प्रक्रिया को या तो ऑनलाइन किया जाए या इसे पूरी तरह से समाप्त किया जाए। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए न केवल जटिलताओं को कम किया है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी सीमित कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों व विक्रेताओं के बीच विश्वास का माहौल बनेगा।

शनिवार, 5 सितम्बर , 2026

चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला: लीजहोल्ड प्रॉपर्टी की बिक्री के लिए अब ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ की जरूरत नहीं

livebharatsamachar.com ब्यूरो: चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर के संपत्ति मालिकों को बड़ी राहत देते हुए लीजहोल्ड प्रॉपर्टी की बिक्री और हस्तांतरण प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब संपत्ति बेचने के लिए अनिवार्य ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ (NDC) की शर्त को समाप्त कर दिया गया है। इस निर्णय से उन हजारों निवासियों को लाभ होगा जो लंबे समय से जटिल कागजी प्रक्रियाओं के कारण परेशान थे।

प्रशासन का निर्णय और प्रक्रिया में बदलाव

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कदम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। पहले लीजहोल्ड संपत्तियों के हस्तांतरण के समय एस्टेट ऑफिस से एनडीसी लेना एक अनिवार्य प्रक्रिया थी, जिसमें अक्सर लंबा समय लगता था और कई बार तकनीकी कारणों से फाइलें अटकी रहती थीं। अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जिससे प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया अब काफी तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

प्रशासन के प्रवक्ता ने कहा कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम करना और रियल एस्टेट क्षेत्र में आ रही बाधाओं को दूर करना है। अब संपत्ति हस्तांतरण के लिए केवल आवश्यक दस्तावेजों की जांच ही पर्याप्त होगी।

इस फैसले के मुख्य बिंदु

  • लीजहोल्ड संपत्तियों की बिक्री के लिए अब एनडीसी की अनिवार्यता खत्म।
  • प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी।
  • नागरिकों को एस्टेट ऑफिस के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
  • प्रशासन का यह कदम रियल एस्टेट बाजार में तेजी लाने में सहायक साबित होगा।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

पिछले काफी समय से प्रॉपर्टी डीलर्स और आम जनता की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि एनडीसी की प्रक्रिया को या तो ऑनलाइन किया जाए या इसे पूरी तरह से समाप्त किया जाए। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए न केवल जटिलताओं को कम किया है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी सीमित कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीदारों व विक्रेताओं के बीच विश्वास का माहौल बनेगा।

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