livebharatsamachar.com ब्यूरो: देश के बिजली उत्पादन केंद्रों पर कोयले की किल्लत एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के करीब 50 थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक ‘क्रिटिकल’ यानी बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में बिजली कटौती का संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
कोयले की कमी का संकट
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार तय मानकों से काफी कम हो गया है। भीषण गर्मी और औद्योगिक मांग बढ़ने के कारण बिजली की खपत में रिकॉर्ड इजाफा हुआ है, जिसके चलते कोयले की खपत भी तेजी से बढ़ी है। हालांकि, सरकार का दावा है कि आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोयले की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो पीक ऑवर के दौरान कई राज्यों में लोड शेडिंग की समस्या का सामना आम जनता को करना पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु और चिंताएं
- देश के 50 से अधिक पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक 25 प्रतिशत से भी कम बचा है।
- मानसून के कारण कोयला खदानों से परिवहन में आ रही बाधाएं भी आपूर्ति प्रभावित कर रही हैं।
- बिजली मंत्रालय ने सभी राज्यों को कोयला स्टॉक बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं।
- कोयला मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच समन्वय बढ़ाकर आपूर्ति को सुचारू करने का प्रयास जारी है।
आगे की राह
सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए आयातित कोयले के मिश्रण (blending) को बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है। साथ ही, रेलवे को प्राथमिकता के आधार पर कोयला रैक आवंटित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पावर प्लांट तक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। आने वाले हफ्तों में कोयले की उपलब्धता ही यह तय करेगी कि देश में बिजली की स्थिति सामान्य बनी रहती है या नहीं।