livebharatsamachar.com ब्यूरो: वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती धमक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता को अब दुनिया के विकसित देश भी स्वीकार करने लगे हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर डी क्रू ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूरोप को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दी गई चेतावनियों को समझने में थोड़ी देर हो गई है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के बढ़ते प्रभाव और रणनीतिक स्वायत्तता की पुष्टि करता है।
वैश्विक मंच पर मोदी की कूटनीति
पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘यह युग युद्ध का नहीं है’। यूक्रेन-रूस संघर्ष के दौरान भारत का संतुलित रुख और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका ने पश्चिमी देशों को सोचने पर मजबूर किया है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री का यह स्वीकार करना कि यूरोप ने इन संकेतों को समझने में देरी की, भारत की विदेश नीति की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
यूरोप को यह स्वीकार करना होगा कि हमने प्रधानमंत्री मोदी की चिंताओं और चेतावनियों को बहुत देर से समझा। आज भारत की आवाज वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज बन चुकी है और हमें उनके साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु और निष्कर्ष
- बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत को एक महत्वपूर्ण वैश्विक भागीदार के रूप में स्वीकार किया।
- यूरोपीय देशों में अब भारत की रणनीतिक सलाह को गंभीरता से लिया जा रहा है।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है।
- आर्थिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर भारत-यूरोप के बीच सहयोग के नए द्वार खुल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान न केवल प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भविष्य की वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका अपरिहार्य है। यूरोप अब अपनी निर्भरता कम करने और भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ साझेदारी मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।