Livebharatsamachar ब्यूरो: दिल्ली-एनसीआर में प्रशासन की तमाम सख्ती और प्रतिबंधों के बावजूद जानलेवा चाइनीज मांझे का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रतिबंधित कांच-लेपित धागे अब नए और भ्रामक नामों के साथ बाजार में धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। दुकानदार ग्राहकों को लुभाने के लिए इसे ‘मोनोकाइट’ (Monokite) और ‘कोबरा’ (Cobra) जैसे कोड-नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके।
‘ओरिजिनल जानवर’ के नाम से हो रही तस्करी
जांच में सामने आया है कि पतंगबाजी के शौकीनों के बीच इन धागों को ‘ओरिजिनल जानवर’ के नाम से भी पुकारा जा रहा है। ये धागे न केवल बेहद मजबूत होते हैं, बल्कि इनमें कांच की कोटिंग इतनी बारीक होती है कि ये राहगीरों और पक्षियों के लिए काल का ग्रास बन जाते हैं। छोटे-छोटे बैक-एली (गलियों के अंदर) स्थित दुकानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए इनकी गुप्त डिलीवरी की जा रही है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी सक्रिय गिरोह
दुकानदारों का कहना है कि वे सीधे तौर पर ‘चाइनीज मांझा’ नहीं बेचते, लेकिन ग्राहकों की मांग पर वे ‘स्पेशल धागा’ निकालकर देते हैं। ऑनलाइन ई-कॉमर्स साइट्स और टेलीग्राम ग्रुप्स पर भी इन धागों को सामान्य धागा बताकर बेचा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चाइनीज मांझा न केवल इंसानों के गले को काटने की क्षमता रखता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी घातक है क्योंकि यह बायोडिग्रेडेबल नहीं है और लंबे समय तक बिजली के तारों में फंसकर शॉर्ट सर्किट का कारण बनता है।
प्रमुख बिंदु:
- प्रतिबंधित मांझा अब ‘मोनोकाइट’ और ‘कोबरा’ ब्रांड के नाम से बिक रहा है।
- विक्रेता इसे ‘ओरिजिनल जानवर’ बताकर ग्राहकों को गुमराह कर रहे हैं।
- ऑनलाइन और गुप्त गलियों के जरिए कानून की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।
- प्रशासनिक सख्ती के बावजूद एनजीओ और स्थानीय लोग लगातार घटनाओं की रिपोर्ट कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने अब इन गुप्त ठिकानों पर छापेमारी तेज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल छापेमारी से इस जानलेवा व्यापार पर लगाम लग पाएगी? जब तक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक आम जनता की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा।