बस्ती ,03 अक्टूबर : लाइव भारत समाचार :- इस नश्वर दुनिया में कुछ लोग पहले से बने रास्तों पर चलते हैं, जबकि कुछ अपने जीवन से ऐसे पथ का निर्माण करते हैं, जिस पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व करती हैं और उन्हें एक प्रकाशस्तंभ मानकर भविष्य की राह बनाती हैं।
ऐसे ही व्यक्तित्व थे पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी, जिनके पुण्यतिथि पर उन्हें नम आंखों से श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया। जिनका जन्म 1950 ई. में संतकबीरनगर (तत्कालीन बस्ती जनपद) के महुली थाना क्षेत्र के ग्राम भिटहा में हुआ था । उनके जीवन में अनेक कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद वे अडिग रहे और शिक्षा के क्षेत्र में नई धारा प्रवाहित करते हुए पूरे पूर्वांचल का मान बढ़ाया।
पं. सूर्यनारायण चतुर्वेदी के पिता का नाम पं. अंबिका प्रताप नारायण चतुर्वेदी तथा माता का नाम चंद्रकली देवी था। मात्र 5 वर्ष की उम्र में पिता का निधन हो गया, जिसके बाद वे अपनी माता और भाइयों वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी व गोमती प्रसाद चतुर्वेदी के स्नेहिल संरक्षण में पले-बढ़े। वे बचपन से ही मेधावी रहे। स्नातक की शिक्षा हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज खलीलाबाद से, परास्नातक गोरखपुर विश्वविद्यालय से तथा बी.एड. की शिक्षा रतन सेन डिग्री कॉलेज, बाँसी से प्राप्त की।
शिक्षा के क्षेत्र में इनका बहुत योगदान रहा।
समाज और परिवार के प्रति दायित्व का भाव उनमें प्रारंभ से ही था। ग्रामीण अंचल के बच्चों को शिक्षा से वंचित देखकर उन्होंने मात्र 30 वर्ष की आयु में 1980 में अपने पैतृक गाँव के समीप ग्राम परवता में बाबा पर्वतनाथ इंटर कॉलेज की स्थापना की। इसके बाद यह शैक्षिक यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही।
सन 2002-03 में उच्च शिक्षा की कमी देखकर उन्होंने पं. अंबिका प्रताप नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डुमरी हरिहरपुर, संतकबीरनगर की नींव रखी। धीरे-धीरे उनके प्रयासों से जिले में अनेक उच्च शिक्षण संस्थान खड़े हुए, जहाँ बी.कॉम, बी.एस.सी., एम.कॉम, एम.एस.सी., बी.पी.एड., बी.एड., डी.एल.एड., एम.एड. जैसे पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिससे हजारों विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
इसी क्रम को बढ़ाते उन्होंने बस्ती जिले में भी शिक्षा का दीप जलाया। 2006-07 में जामडीह गाँव में जी.एस.पी.जी. कॉलेज स्थापित किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक परिश्रम से बस्ती शहर और उसके आसपास कई शैक्षिक संस्थाएँ शुरू हुई।
शैक्षिक क्रांति के साथ ही उन्होंने राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ी। परिवार को एक साथ जोड़ने वाले उन्होंने अपने भतीजे दिग्विजय नारायण (जय चौबे) को राजनीति में आगे बढ़ाया और वर्ष 2000 में उन्हें जिला पंचायत सदस्य एवं उपाध्यक्ष की कुर्सी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद 2006 में अपने पुत्र अजय को ब्लॉक प्रमुख नाथनगर बनवाया और 2010 में अपने छोटे बेटे राकेश चतुर्वेदी को निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख चुने जाने में अहम योगदान दिया। वे बस्ती लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार भी रहे।
उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता का ही परिणाम था कि खलीलाबाद विधानसभा से उनके भतीजे जय चौबे विधायक बने। परिवार को साथ लेकर चलने की उनकी सोच जीवन के अंतिम क्षणों तक बनी रही।
पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन देखा जाय तो
बड़े भाई वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी दिल्ली में व्यवसाय कर रहे हैं, जबकि दूसरे भाई गोमती प्रसाद चतुर्वेदी डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं। बड़े पुत्र डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी सूर्या इंटरनेशनल एकेडमी, खलीलाबाद के प्रबंध निदेशक हैं, और छोटे पुत्र अजय प्रताप नारायण उर्फ राकेश चतुर्वेदी एस.आर. इंटरनेशनल एकेडमी, नाथनगर का संचालन कर रहे हैं।
तीनों पुत्रियाँ—संध्या, कंचन और कुमुम—विवाह के उपरांत परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रही हैं। बहुएँ—सविता और शिखा चतुर्वेदी—शैक्षिक एवं सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं।
आज उनका परिवार सूर्या हॉस्पिटल, एस.आर. हॉस्पिटल, शिखा चतुर्वेदी लॉ कॉलेज, राकेश चतुर्वेदी डिग्री कॉलेज, राजन इंटरनेशनल एकेडमी, रजत हॉस्पिटल सहित अनेक संस्थानों का संचालन कर रहा है। सरलता और सहजता उनकी सबसे बड़ी पहचान रही, और यही गुण आज उनके परिवार में भी दिखाई देता है।
पूर्वांचल के मालवीय कहे जाने वाले स्वर्गीय पंडित सूर्यनारायण चतुर्वेदी ने जब समाज में पिछड़ेपन की जड़ तलाश की तो पाया कि शिक्षा की कमी ही सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने बाबा पर्वतनाथ इंटर कॉलेज से जो पौधा लगाया था, वह आज वटवृक्ष बन चुका है।
उनकी पुण्यतिथि 3 अक्टूबर को पूरे श्रद्धाभाव से मनाई जा रही है । उनके सपनों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
रिपोर्ट ,बस्ती ब्यूरो : लाइव भारत समाचार