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Livebharatsamachar ब्यूरो: विमानन कंपनी स्पाइसजेट को एक उपभोक्ता अदालत ने बड़ी राहत देने के बजाय जुर्माना भरने का सख्त आदेश दिया है। मामला एक परिवार की यात्रा से जुड़ा है, जो एयरलाइन की फ्लाइट में देरी के कारण अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट चूक गए थे। इस लापरवाही के चलते उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को कुल 85,816 रुपये का हर्जाना भरने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यात्री अग्रवाल परिवार ने अपनी यात्रा के दौरान स्पाइसजेट की सेवाओं में देरी की शिकायत दर्ज कराई थी। उड़ान में देरी के कारण वे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट छोड़नी पड़ी। इस असुविधा और आर्थिक नुकसान को देखते हुए उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन की सेवा में कमी को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।

आयोग का सख्त निर्देश

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पाइसजेट को तीन महीने का समय दिया है ताकि वे इस राशि का भुगतान कर सकें। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो कंपनी को 15 प्रतिशत वार्षिक दंड ब्याज का भुगतान करना होगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित पक्ष को आदेश के निष्पादन के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ता है, तो स्पाइसजेट को अतिरिक्त 10,000 रुपये का भुगतान भी करना होगा।

मुख्य बिंदु

मंगलवार, 22 सितम्बर , 2026

स्पाइसजेट को लगा बड़ा झटका: फ्लाइट देरी के कारण यात्री को हर्जाना देने का आदेश

Livebharatsamachar ब्यूरो: विमानन कंपनी स्पाइसजेट को एक उपभोक्ता अदालत ने बड़ी राहत देने के बजाय जुर्माना भरने का सख्त आदेश दिया है। मामला एक परिवार की यात्रा से जुड़ा है, जो एयरलाइन की फ्लाइट में देरी के कारण अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट चूक गए थे। इस लापरवाही के चलते उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को कुल 85,816 रुपये का हर्जाना भरने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यात्री अग्रवाल परिवार ने अपनी यात्रा के दौरान स्पाइसजेट की सेवाओं में देरी की शिकायत दर्ज कराई थी। उड़ान में देरी के कारण वे समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट छोड़नी पड़ी। इस असुविधा और आर्थिक नुकसान को देखते हुए उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन की सेवा में कमी को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है।

आयोग का सख्त निर्देश

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में स्पाइसजेट को तीन महीने का समय दिया है ताकि वे इस राशि का भुगतान कर सकें। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो कंपनी को 15 प्रतिशत वार्षिक दंड ब्याज का भुगतान करना होगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित पक्ष को आदेश के निष्पादन के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ता है, तो स्पाइसजेट को अतिरिक्त 10,000 रुपये का भुगतान भी करना होगा।

मुख्य बिंदु

  • स्पाइसजेट को कुल 85,816 रुपये का हर्जाना देने का आदेश।
  • भुगतान के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की गई है।
  • समय पर भुगतान न होने पर 15 प्रतिशत का वार्षिक दंड ब्याज लगेगा।
  • निष्पादन लागत के रूप में अतिरिक्त 10,000 रुपये का प्रावधान।

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