लाइव भारत समाचार में आपका स्वागत है एथेनॉल मिश्रण पर उठे सवाल, ईंधन की कीमतों में राहत क्यों नहीं? बस्ती से कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला; कहा—कच्चे तेल के दाम घटे, फिर भी जनता और किसानों को राहत नहीं बस्ती, 3 जुलाई | बस्ती ब्यूरो देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (इथेनॉल ब्लेंडिंग) की नीति को लेकर सियासी बहस तेज होती जा रही है। बस्ती में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने केंद्र सरकार की ईंधन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एथेनॉल मिश्रण से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है, विदेशी तेल पर निर्भरता घट रही है और आयात पर होने वाला खर्च कम हो रहा है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ देश की जनता और किसानों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी, तब सरकार ने राष्ट्रहित का हवाला देकर जनता से महंगे पेट्रोल और डीजल का बोझ उठाने की अपील की थी। लोगों ने भी देशहित को सर्वोपरि मानते हुए बढ़ती कीमतों का भार सहन किया। लेकिन अब जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित राहत क्यों नहीं दी जा रही है? उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित केवल जनता के त्याग तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ भी आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को इस समय का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार को इसकी पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वाहन चालकों को माइलेज में कमी या इंजन के प्रदर्शन को लेकर कोई चिंता है, तो उस पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति न रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के किसान धान की रोपाई में जुटे हुए हैं और कृषि कार्यों में डीजल की बड़ी भूमिका है। महंगे डीजल के कारण किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इसका प्रभाव केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों की कीमतों और आम परिवारों के मासिक खर्च पर भी सीधा पड़ रहा है। विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि सरकार एथेनॉल मिश्रण को किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताती है, लेकिन यदि इससे वास्तव में आर्थिक लाभ हो रहा है तो उसका प्रभाव ईंधन की खुदरा कीमतों में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार ईंधन मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाए और कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ शीघ्र जनता तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि जनता ने हर राष्ट्रीय चुनौती के समय सरकार का साथ दिया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों, वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं को राहत देकर यह विश्वास कायम करे कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को भी आसान बनाना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण और ईंधन मूल्य निर्धारण का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक नीति की बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसानों, उपभोक्ताओं, परिवहन क्षेत्र और महंगाई से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट : बस्ती ब्यूरो | लाइव भारत समाचार
शुक्रवार, 3 जुलाई , 2026

बस्ती से कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला; कहा—कच्चे तेल के दाम घटे, फिर भी जनता और किसानों को राहत नहीं

एथेनॉल मिश्रण पर उठे सवाल, ईंधन की कीमतों में राहत क्यों नहीं?

बस्ती से कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला; कहा—कच्चे तेल के दाम घटे, फिर भी जनता और किसानों को राहत नहीं

बस्ती, 3 जुलाई | बस्ती ब्यूरो

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (इथेनॉल ब्लेंडिंग) की नीति को लेकर सियासी बहस तेज होती जा रही है। बस्ती में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने केंद्र सरकार की ईंधन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि एथेनॉल मिश्रण से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो रही है, विदेशी तेल पर निर्भरता घट रही है और आयात पर होने वाला खर्च कम हो रहा है, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ देश की जनता और किसानों को भी मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी, तब सरकार ने राष्ट्रहित का हवाला देकर जनता से महंगे पेट्रोल और डीजल का बोझ उठाने की अपील की थी। लोगों ने भी देशहित को सर्वोपरि मानते हुए बढ़ती कीमतों का भार सहन किया। लेकिन अब जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, तब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित राहत क्यों नहीं दी जा रही है? उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित केवल जनता के त्याग तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ भी आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को इस समय का सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार को इसकी पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वाहन चालकों को माइलेज में कमी या इंजन के प्रदर्शन को लेकर कोई चिंता है, तो उस पर स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति न रहे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश के किसान धान की रोपाई में जुटे हुए हैं और कृषि कार्यों में डीजल की बड़ी भूमिका है। महंगे डीजल के कारण किसानों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इसका प्रभाव केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, खाद्य पदार्थों की कीमतों और आम परिवारों के मासिक खर्च पर भी सीधा पड़ रहा है।

विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि सरकार एथेनॉल मिश्रण को किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताती है, लेकिन यदि इससे वास्तव में आर्थिक लाभ हो रहा है तो उसका प्रभाव ईंधन की खुदरा कीमतों में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार ईंधन मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाए और कच्चे तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ शीघ्र जनता तक पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि जनता ने हर राष्ट्रीय चुनौती के समय सरकार का साथ दिया है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों, वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं को राहत देकर यह विश्वास कायम करे कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को भी आसान बनाना है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण और ईंधन मूल्य निर्धारण का मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक नीति की बहस का महत्वपूर्ण विषय बन सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध किसानों, उपभोक्ताओं, परिवहन क्षेत्र और महंगाई से जुड़ा हुआ है।

रिपोर्ट : बस्ती ब्यूरो | लाइव भारत समाचार

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