दसिया एथेनॉल फैक्ट्री विवाद: जनता के समर्थन में गांव पहुंचे सांसद राम प्रसाद चौधरी और विधायक राजेंद्र चौधरी, बैरिकेडिंग देख प्रशासन पर बरसे

‘विकास के नाम पर जनता के अधिकारों का हनन स्वीकार नहीं, जनता का हित सर्वोपरि’ — सांसद राम प्रसाद चौधरी

बस्ती/सल्टौआ गोपालपुर। प्रस्तावित दसिया एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक और जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। क्षेत्र में फैक्ट्री स्थापना के विरोध को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच समाजवादी पार्टी के सांसद राम प्रसाद चौधरी तथा रुधौली विधायक राजेंद्र चौधरी ग्रामीणों से मिलने गांव पहुंचे। इस दौरान गांव के प्रवेश मार्ग पर पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा व्यवस्था देखकर दोनों जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।

सांसद राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता से मिलने जाने वाले जनप्रतिनिधियों को रोकना और गांव को पुलिस छावनी में बदल देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास और औद्योगिकीकरण का वे विरोध नहीं करते, लेकिन यदि किसी परियोजना के कारण स्थानीय लोगों के अधिकार, आजीविका, पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं उत्पन्न होती हैं तो सरकार और प्रशासन का पहला दायित्व जनता का विश्वास जीतना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “जनता का हित सर्वोपरि है। विकास के नाम पर भोली-भाली जनता का शोषण और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
रुधौली विधायक राजेंद्र चौधरी ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण अपनी आशंकाओं और समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में संवाद स्थापित करने के बजाय पुलिस बल के माध्यम से स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की बात सुनना और उनकी सहमति के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।
दोनों नेताओं ने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज विधानसभा से लेकर संसद तक प्रभावी ढंग से उठाई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मुद्दे को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया जाएगा ताकि प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
प्रशासन की बैरिकेडिंग बनी चर्चा का विषय
ग्रामीणों से मिलने पहुंचे नेताओं को गांव के बाहर पुलिस बैरिकेडिंग और भारी सुरक्षा व्यवस्था का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ समय तक प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न आशंकाओं को नेताओं के समक्ष रखा और परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शिता तथा निष्पक्ष निर्णय की मांग की।
विवाद के केंद्र में प्रस्तावित एथेनॉल परियोजना
दसिया में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर पिछले कुछ समय से क्षेत्र में विरोध और समर्थन दोनों की स्थिति बनी हुई है। विरोध करने वाले ग्रामीण पर्यावरण, कृषि भूमि, जल स्रोतों और स्थानीय जीवन पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जता रहे हैं, जबकि परियोजना के समर्थक इसे क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन से जोड़कर देख रहे हैं। इसी बीच जनप्रतिनिधियों के गांव पहुंचने से यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।
रिपोर्ट ब्यूरो बस्ती|लाइव भारत समाचार