बस्ती। 13 मार्च:- लाईव भारत समाचार:- सोशल मीडिया पर इन दिनों ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर को लेकर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में रेडियोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर न होने का आरोप लगाया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सेंटर के संचालक डॉ. सत्येंद्र ओझा ने सामने आकर आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
डॉ. ओझा ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही खबर तथ्यहीन है और इससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेंटर पर सभी मेडिकल प्रक्रियाएं नियमानुसार संपन्न की जाती हैं तथा रिपोर्ट पर रेडियोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर भी किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि कई बार ऐसी परिस्थिति बन जाती है जब मरीज या उनके परिजन अत्यधिक जल्दबाजी में होते हैं। कुछ मामलों में मरीज को तत्काल किसी चिकित्सक को दिखाना होता है, जिसके कारण वे रिपोर्ट तैयार होते ही उसे लेकर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में कभी-कभार हस्ताक्षर या मोहर बाद में होने की स्थिति बन जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी प्रकार के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
डॉ. ओझा ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सेंटर में मरीजों की सुविधा और सही जांच रिपोर्ट देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी सरकारी सेवा में नहीं हैं और अधिकांश समय सेंटर पर ही उपलब्ध रहते हैं, जिससे किसी भी प्रकार की समस्या होने पर मरीज या उनके परिजन सीधे संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर या मोहर को लेकर कोई भी संदेह हो, तो संबंधित व्यक्ति सेंटर पर आकर उसे तत्काल पूरा करवा सकता है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना सत्यता जाने किसी भी प्रकार की खबर या सूचना को सोशल मीडिया पर साझा न करें, क्योंकि इससे संस्थान की छवि को अनावश्यक नुकसान पहुंचता है।
अंत में डॉ. ओझा ने भरोसा दिलाया कि सेंटर का उद्देश्य मरीजों को बेहतर, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध कराना है, और भविष्य में भी सभी जांच एवं रिपोर्ट पूर्ण पारदर्शिता तथा नियमों के अनुरूप ही जारी की जाएंगी।
रिपोर्ट, अजय श्रीवास्तव लाईव भारत समाचार